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संयोग से मिला राजनीत में मौका।

अजीत पवार ने बताई पाला बदलने और बीजेपी शिंदे से हाथ मिलाने की पूरी कहानी।

विजय कुमार भारद्वाज/मुंबई

संयोग से मिला राजनीत में मौका।अजीत पवार ने बताई पाला बदलने और बीजेपी-शिंदे से हाथ मिलाने की पूरी कहानी।

मुंबई/महाराष्ट्र: डिप्टी सीएम अजित पवार ने रविवार रात अपने ‘एक्स’ हैंडल पर एक बयान जारी कर पाला बदलने और बीजेपी और शिवसेना से हाथ मिलाने की पूरी कहानी बताई है। अजित पवार ने महाराष्ट्र की जनता को बताया कि मैंने एक विचारधारा और उद्देश्य के साथ बिना किसी समझौता किए विकास कार्यों को पूरा करने के इरादे से चाचा शरद पवार से बगावत कर पाला बदला। मैंने पाया कि देश में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में विकास कार्य हो रहे हैं। मुझे उनके तेज नेतृत्व और सही निर्णय लेने की प्रक्रिया जैसे गुण पसंद आए। मेरी और उनकी कार्यशैली बहुत समान है। हमें काम के प्रति अधिक प्यार है और मैं उनके साथ अपनी भविष्य की विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर पाऊंगा।चाचा शरद पवार का नाम लिए बिना अजीत पवार ने कहा कि बड़ों का अनादर करने का मेरा कोई इरादा नहीं है। किसी का अपमान करने, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने, किसी के साथ विश्वासघात करने या किसी की पीठ में छुरा घोंपने का बिल्कुल भी इरादा नहीं था और न ही कभी होगा। मेरे मन में हमेशा बड़ों के प्रति सम्मान, साथियों को साथ लेकर चलने और युवाओं को जगह-जगह अवसर देने की भावना रही है। आज भी मैंने सिर्फ स्टैंड लिया है, साफ स्टैंड है कि सत्ता है तो विधानसभा क्षेत्र सहित प्रदेश में सभी विकास कार्य तेजी से होंगे।अजीत पवार ने कहा कि वर्ष 1991 से मैं सही मायनों में राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ रहा हूं। मुझे राजनीति में कौन लाया, किसने मुझे मंत्री पद दिया, किसने मुझे अवसर दिए, इस पर बहुत चर्चा हुई। दरअसल मुझे राजनीति में मौका संयोग से मिला। उस समय प्रदेश स्तर पर नेतृत्व के लिए एक युवा की जरूरत थी, तो परिवार के सदस्य के रूप में मुझे वह मौका मिला। अवसर मिलने के बाद मैंने दिन-रात मेहनत की। अन्य सभी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज किया और खुद को सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। यह यात्रा तीन दशकों से अधिक समय से चल रही है। मेरा ध्यान हमेशा न केवल अवसरों को पाने पर बल्कि लोगों से काम कराने के लिए उनका उपयोग कैसे किया जाए इस पर भी था। सुबह पांच बजे से काम शुरू करने की आदत बना ली क्योंकि उपलब्ध समय में सामाजिक, रचनात्मक और विकास कार्य तेजी से किये जाने चाहिए। मैंने हमेशा उन मतदाताओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने का प्रयास किया है जिन्होंने मतदाताओं से प्यार किया और अपना विश्वास व्यक्त किया। राजनीति के समाजीकरण में पहले दिन से ही विकास को किसी भी अन्य मुद्दे की तुलना में सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। कुछ समय तक वह सत्ता में रहे और कुछ समय तक विपक्ष में रहे। सत्ता में रहते हुए काम की गति और विपक्ष में रहते हुए रुके काम दोनों का अनुभव किया। इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता है कि यदि कोई जनता के प्रतिनिधि के रुप में काम करना चाहता है तो उसके पास सत्ता का पावर होनी चाहिए। इस अवसर पर मैं राज्य की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि वे विकास कार्य के इस पथ पर मेरे साथ आए, सभी जनता अपना आर्शीवाद दें।

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